प्यार कर रहें है जरा संभलकर
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- Monday, 07 January 2013 01:52
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इनमें से कुछ-कुछ बातों में या अधिकांश में तो व्यक्ति परिवर्तन स्वीकार कर लेता है लेकिन कहीं-कहीं उसे यह हस्तक्षेप अपने निजी जीवन में हस्तछेप डालने वाला लगता है जिसे वह बिल्कुल सहन नहीं कर पाता और चाहकर भी इसमें बदलाव लाना नहीं चाहता.उसे अपने पार्टनर का
इतना पजेसिव होकर या कहें इतनी आकांक्षा पालना अपने साथी के प्रति ज्यादती लगती है. क्योंकि यह अपनी-अपनी पसंद का सवाल होता है.कुछ जगह पर तो आपका साथी आपकी बातों से सहमत हो सकता है पर बार-बार समझौता करना उसे बर्दास्त नही होता .और फिर प्यार का तो वसुल है.जिस तरह मै हुं मूझे स्वीकार करों.ऐसी स्थिति में आप अपने साथी को बदलने की कोशिश न करना ही रिश्तों के लिए बेहतर होता है.तो आइए जानते हैं ऐसे ही कुछ अनछुए पहलुओं को जो आपके प्यार में मिठास घोल सकतें हैं.
समय के साथ समझौता कर लें
जब आपका रिश्ता नया-नया होता है तो इसमें ढेरों औपचारिकताएं शामिल होती हैं.जैसे घंटों फोन पर बात करना, एक दूसरे का कुछ ज्यादा ही ख्याल रखना. डेट वगैरह पर समय पर न पहुंचने पर माफी मांग लेना आदि या किसी तरह से पटा लेना. वक्त बीतने पर जब रिस्ता बढ़ जाता है तब ये उम्मीद कम कर देना चाहिए.यहां पर इस रूप में ले लें कि इस रिश्ते में थोड़ा गाढ़ापन आने पर इन औपचारिकताओं को विशेष जरूरत नहीं रहती ऐसी बातें भी दोनों ओर से होनी चाहिए.
दिल की भी सुन लें
तारीफ सुनना हर व्यक्ति को अच्छा लगता है, लेकिन शुरू-शुरू रिश्ते की तुलना में जिम्मेदारियां बढ़ने के साथ यदि इसमें तीव्र गिरावट आने पर विशेष चिंतित न होंना ही शुरू की बातों को लेकर तानाकशी करें कि पहले तो ऐसा कहा करते थे अब क्या हो गया आदि. एक-दूसरे की तारीफ नहीं कर पाते या किसी चीज पर ध्यान देने के बजाय व्यस्तता का हवाला देते हुए कुछ चीजों पर ध्यान न जाए. इन चीजों को मुंह से कहने सुनने की बजाय यहां दिल का सहारा लें.
दोनो की भावनाएं अलग है इस बात का ध्यान रखें-
शारीरिक आकर्षण तो एक प्राकृतिक लक्षण हैं जिससे कोई भी परे नहीं रह पाया है.हमारे समाज में कुछ नियमों को संस्कार का रूप दिया है जिसे कई बार युवा वर्ग अपनाने से मना कर देते हैं इसका मतलब ये नहीं को आप एक-दूसरे से सिर्फ शारीरिक आकर्षण के कारण जुड़े हैं. यदि आप इन नियमों का पालन करना चाहते हैं तो यह आप पर निर्भर करता है कि नाराज होने के बजाय प्यार से समझाएं. दैहिक संबंध से परे एक और चीज बहुत महत्वपूर्ण होती है वो है स्पर्श जो उसे प्रियतमा के दैहिक आकर्षण से परे अपनत्व का एहसास दिलाएगा.
एक-दूसरे को समझने की कोशिश करें
अपनी सारी भावनाएँ दूसरों के सामने जाहिर न करें.अगर उन्हें किसी बात से नाराजगी भी होती है तो वे उसे सबके सामने जाहिर न करें.इसका आप दोनों पर गलत प्रभाव पड़ सकता है. कई बार ऐसा भी होता है कि किसी छोटी-सी बात पर या बेवजह बहुत तेज गुस्सा आता है और ऐसी स्थिति में आपसी संबंधों में दरार पड़ने तक की नौबत आ जाती है. ऐसी स्थिति में एक दुसरे को समझने के लिए पर्याप्त समय देना ही सबसे अच्छा रास्ता है.
अगर आप दोनों के संबंधों में कभी ऐसी स्थिति आए तो उसे सुधारने के मामले में आपकी जिम्मेदारी बढ़ जाती है..इसलिए जिस समय आपके साथी को गुस्सा आ रहा हो तो उस वक्त आप उसे कुछ न कहें. बाद में जब उसका गुस्सा शांत हो जाए तब आप उसे प्यार से समझाएँ कि उसे ऐसा नहीं करना चाहिए था.इसलिए बेहतर यही होगा कि आप अपने साथी को नाराज होने का मौका नहीं दें.
इस तरह अगर आप अपने साथी को समझने की कोशिश करेंगे तो निश्चित रूप से आपके संबंध मधुर बने रहेंगे और आपका प्यार भी बरकरार रहेगा.






