गुलाबी नगर में पतंगों की कलाबाजी
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- Friday, 11 January 2013 21:41
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जयपुर.गुलाबी नगरी जयपुर में मकर संक्राति पर होने वाली पतंगबाजी में इस बार फिल्मी कलाकारों के मुखौटे वाली पतंग के बजाय रंगबिरंगे पतंगों को ज्यादा तवज्जो मिल रही है. मकर सक्रांति 14 जनवरी के दिन पतंगबाजी के लिए लोगों का उत्साह चरम पर होता हैं, लेकिन इसके तीन दिन पहले ही वो काटा. वो मारा की आवाजें गूंजनी शुरु हो गई हैं. राज्य में पिछले दिनों कड़ाके ठंड के कारण इस त्योहार तक स्कूलों की छुट्टियां होने के कारण सुबह से ही बच्चे और युवा अपनी छतों पर जुटना शुरु होने लगे हैं. पिछली बार प्रसिद्ध समाजसेवी अन्ना हजारे, फिल्म कलाकारों एवं कई नेताओं के मुखौटा वाली रंग बिरंगी पतंगों के साथ लोगों का पतंग उड़ाने के प्रति उत्साह चरम पर था, लेकिन इस बार एक दो फिल्मी कलाकार अक्षय कुमार आदि के मुखौटा वाली पतंगों के साथ रंगबिरंगी पतंगों को ज्यादा तवज्जो दी गई हैं. इसी तरह खातीपुरा पुलिया के बस स्टेण्ड के सामने पतंग बेच रहे एक दुकानदार ने कहा कि इस बार पतंगों पर हथकंड़े अपनाने की बजाए रंगों को तरजीह दी गई हैं, हालांकि कई पतंगों पर शेर-हाथी के साथ अन्य जंगली जानवरों के एक साथ चित्र वाले पतंग भी बाजार में उपलव्ध कराए गए हैं. शहर के दुकानदारों का कहना हैं कि महंगाई के चलते इस बारलोग केवल रंगों वाली पतंग ही पसंद कर रहे हैं, इसलिए इस बार बाजार में किसी नेता, कलाकार के चेहरों वाली पतंगे कम नजर आ रही हैं. उनका कहना है कि पिछली बार से पतंगों में करीब चालीस प्रतिशत की वृद्धि होने तथा अभी मकर संक्राति के तीन-चार दिन शेष रहने के कारण लोगों का पतंग खरीदने के लिए उत्साह थोड़ा कम हैं, जबकि रविवार एवं सोमवार को इसके प्रति जबरदस्त उत्साह रहने की संभावना हैं. शहर के मुख्य बाजारों जौहरी बाजार, किशनपोल, हांडीपुरा तथा अन्य कई स्थानों पर जहां पतंग, चरखी, मांझे, डोर आदि की दुकानों पर खरीददारी करने वालों की भीड़ जुटने लगी हैं, वहीं जगह जगह गली मोहल्लों में भी लोगों ने अपने घर के बाहर दुकान सजाकर पतंग बेचने लगे हैं. उधर इस अवसर पर पर्यटन विभाग की ओर से सोमवार को पंतग महोत्सव का आयोजन किया जाएगा, जिसमें राजस्थानी लोक संगीत की धुनों के बीच बुजुर्ग पतंगबाज बाबू खान की एक ही डोर पर सौ पतंगे उड़ाना मुख्य आकर्षण रहेगा. इसके अलावा देशी-विदेशी पर्यटकों के साथ लोग महोत्सव में शहनाई वादन, अलगोजा वादन, कालबेलिया नृत्य, भौंपा, कठपुतली प्रदर्शन का लुत्फ उठाएंगे. इतना ही नहीं इस मौके तिल के लड्डू एवं दाल की पकौड़ी का स्वाद भी लिया जा सकेगा. पंतगबाजी के चलते डोर-मांझे की चपेट में आकर घायल पक्षियों के इलाज के लिए जयपुर चिड़ियाघर में जहां अभी से तैयारी शुरु कर दी गई हैं, वहीं मानसरोवर युवा मंच ने परिंदों के लिए "आप भी बने सहयोगी" बैनर का विमोचन किया हैं. इसी तरह पक्षी प्रेमी तथा अन्य संगठन भी घायल पक्षियों के इलाज के लिए जुटने लगे है.






